साक्षात्कार

महासभा - सवाल आपके, जवाब सभापति के....

 समाज बंधुओं द्वारा उठे सवालों के जवाब के लिए अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के राष्ट्रीय सभापति श्री रामपाल सोनी ने नि:संकोच जवाब दिया जो यहां प्रस्तुत हैं...
साक्षात्कार - मोहनलाल मंत्री(माहेश्वरी मंच प्रबंध संपादक) द्वारा

प्रश्न 1 - महासभा की आगामी बैठक नागपुर में दिनांक 22,23,24 जुलाई को होगी बैठक में किन समस्याओं का निराकरण होगा और जो विचाराधीन समस्या है क्या उनका उचित निर्णय हो गया है?
- सभी योजनाएँ व कार्यक्रम तीव्रगति के साथ लागू हो और समाज के जरूरतमंद लोगों को सहायता व मार्गदर्शन समय पर कैसे-कैसे मिले, इसके लिए नागपुर की इस बैठक में चर्चा होगी साथ ही विधान संशोधन का कार्य भी इसी बैठक में किया जाएगा।

प्रश्न 2 - आपके दोबारा सभापति निर्वाचित होने के बाद से आजतक आपने समाज को क्या-क्या दिया और किन क्षेत्रों को अधिक महत्व दिया है जिससे समाज कितना लाभान्वित हुआ है?
- महासभा में दोबारा निर्वाचित होने के बाद मेरे कार्यकाल में ''श्री बांगड माहेश्वरी मेडिकल वेलफेयर सोसायटी'' का गठन कर समाज के ऐसे जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा उपलब्ध कराने का जो बिडा उठाया है उससे अभी तक 25 लोगों को लगभग 11 लाख रुपए की चिकित्सा सहायता प्रदान की है।
          इसके अलावा दिल्ली में छात्रावास के निर्माण के लिए जो भूमि का निर्णय लिया वह लगभग सवा दो करोड की लागत से जमीन क्रय की जा चुकी है जिसका निर्माण शीघ्र प्रारंभ हो रहा है इसी प्रकार कोटा, भिलाई, पूना व बंबई में भी छात्रावास से माहेश्वरी समाज के छात्रों को सुविधाएँ बराबर उपलब्ध कराई जा रही है।
इसी के साथ '' श्री बद्रीलाल सोनी माहेश्वरी शिक्षा सहयोग केंद्र'' के माध्यम से इस सत्र में 133 बच्चों को लगभग 15 लाख की ॠण सहायता उपलब्ध करवाकर उसके ब्याज पर 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा चुका है।
        साथ ही श्री कृष्णदास जाजु स्मारक ट्रस्ट से 279 विधवा बहनों को 700 रु. प्रतिमाह की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
        समाज के जरूरतमंद व्यापार करने वाले बंधुओं को ''श्री आदित्य विक्रम बिडला मेमोरियल व्यापार सहयोग केंद्र'' के माध्यम से 5 प्रतिशत ब्याज पर दो लाख रूपए तक की ॠण राशि उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे समाज का यह वर्ग उन्नति कर सके। उक्त सुविधाएँ समाज के जरूरतमंदों को बराबर मिले और संगठन और ज्यादा मजबूत हो, इसके लिए 'संगठन आपके द्वार' पर एक पुस्तिका देश में निवास करने वाले प्रत्येक समाजबंधुओं को वितरण करने की व्यवस्था की गई है। जो अधिकांश वितरण हो चुकी है।
    इस माध्यम से देश में निवास करने वाले माहेश्वरी परिवार की जनसंख्या, अविवाहित युवक-युवतियों के आंकडे, तकनीकि शिक्षा का स्तर, वार्षिक आय का स्त्रोत, ईमेल, आईडी, मोबाइल आदि जानकारियों का विवरण एकत्र करने के लिए यह फार्म वितरित किए गए। जिनमें लगभग 50 प्रतिशत से ऊपर  फार्म भरकर आ चुके है। शेष फार्म के लिए समाजजन इस प्रयास में जुटे हुए है। जो आने वाले समय में देश का हर समाजबंधु इससे जुड सकेगा।
     इसी प्रकार युग परिवर्तन को देखते हुए समाज में वैचारिक क्रांति लाने व देश के माहेश्वरी बाहुल्य क्षेत्र में ''टॉक-शो'' की व्यवस्था की गई जिससे समाजजनों की सोच में बदलाव आ सके और समाज उन्नति की ओर अग्रसर हो।

प्रश्न 3 - महासभा में एकता के क्या प्रयास है?
- संगठन में सभी को साथ लेकर कार्य संपादित किये जा रहे हैं  सभी के सहयोग व एकता के बिना इतने सारे कार्यों को अंजाम देना संभव नहीं है।

प्रश्न 4 - महासभा संगठन में सभापति व महामंत्री का पद महत्वपूर्ण होता है परंतु कार्यशैली में भिन्नता क्यो है? क्या दोनों की सीमा अलग-अलग है?
- महासभा के सभापति महामंत्री के कार्यों का विभाजन विधान में स्पष्ट रूप से किया हुआ है और उसी के अनुसार सभापति और महामंत्री अपना-अपना कार्य कर रहे हैं।

प्रश्न 5 - सभापति द्वारा संयुक्त मंत्री की नियुक्ति का आधार क्या है? उसकी सीमा क्या है...?
- महासभा के संगठन के कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभापति को एक सहायक की जरूरत होती है। उसी को ध्यान में रखते हुए महासभा की कार्यसमिति ने यह निर्णय लिया। उसी अनुसार संयुक्त मंत्री का पद बनाया गया है उसकी सीमा सभापति के कार्यों को सहयोग करने की है।

प्रश्न 6 - समाज में चल रहे संगठनों के सारे विवाद खत्म हो गए? या कोई शेष है ऐसे विवाद कब तक समाप्त होंगे?
- हर व्यक्ति की सोच व कार्य करने का अपना तरीका होता है जिसका निराकरण समय-समय पर होता रहता है इसलिए संगठन में छोटे-मोटे विवाद चलना स्वाभाविक है।

प्रश्न 7 - महासभा में वृध्दजनों की आयु का प्रावधान का महत्व क्या है? क्या इससे अनुभवी समाजजनों का संगठन से नाता नहीं टूटेगा? उनसे समाज को  दिशा देने के लिए कोई नया र्फामूला है? जिससे वह भी संगठन से जुडे रहे।
- महासभा के प्रस्तावित संशोधन में वृध्दाओं की आयु 70 वर्ष का प्रस्ताव, विधान संशोधन के प्रावधान को कुछ लोगों ने गलत ढंग से प्रचार कर  गुमराह करने का प्रयास किया है जबकि यह प्रावधान कार्यकारिणी मंडल के सामने अभी प्रस्तावित है अब इसका निर्णय बहुमत के आधार पर होना शेष है कार्यकारिणी मंडल चाहे तो इस प्रस्ताव को निरस्त कर सकता है परंतु इसमें किसी भी संगठन को व किसी को अलग करने व अपमानित करने की ऐसी कोई बात नहीं है। जहां तक अनुभवी व वरिष्ठजनों का सवाल है उन्हें पूर्व से ही आदर व सम्मान दिया जाता रहा है और भविष्य में भी उनसे मार्गदर्शन लेते रहेगे।

प्रश्न 8 - राज्यों के क्षेत्रों के बंटवारे का क्या आधार है? कुछ प्रदेश अनेक भागों में बंटे हुए हैं तो कोई प्रदेश केवल एक भाग तक सीमित है क्यों...? उसका विस्तार संभव है? या नहीं।
- आपका कहना है कि मेरे कार्यकाल के पहले से ही प्रदेशों का गठन किया हुआ है और मेने अपने  कार्यकाल में इसमें किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया है परंतु वर्तमान स्थिति को देखते हुए जिन प्रदेशों में माहेश्वरी परिवारों की संख्या व क्षेत्रफल अधिक है उनका बंटवारा उनके प्रदेशों की सहमति से होना चाहिए। इसी तरह से अंचलों का पुर्नगठन भी अंचलों की जनसंख्या व क्षेत्रफल के आधार पर करना चाहिए।

प्रश्न 9 - महासभा के संगठन का विस्तार करने व कार्यकारिणी मंडल के सदस्यों की संख्या बढाने के लिए न्यासी व ट्रस्टीयों को महासभा में शामिल करने का क्या उद्देश्य है? क्या इससे संगठन मजबूत होगा क्या?
- महासभा के अंतर्गत जितने भी ट्रस्ट चल रहे है उनका कार्य सुचारू रूप से चल सके इसके लिए उन ट्रस्टों के न्यासियों को कार्यकारिणी मंडल में लेना व महासभा की ओर से नामित पदाधिकारियों को उन ट्रस्टों में पदेन न्यासी के रूप में लेने का निर्णय पूर्व से ही चला आ रहा है।

प्रश्न 10 - जब देश की राजधानी दिल्ली है, तो अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा का केंद्रीय कार्यालय दिल्ली में क्यों नहीं? नागपुर में ही क्यों...?
- महासभा का केंद्रीय कार्यालय सन 2005 के पूर्व कहीं भी नहीं था इसी दौरान पूर्व सभापति स्व. श्री चुन्नीलालजी सोमानी ने सन् 2005 में नागपुर में केंद्रीय कार्यालय के पहले उन्होंने एक भवन क्रय किया और जब से केंद्रीय कार्यालय नागपुर में चल रहा है।
देश की राजधानी दिल्ली होने के कारण यदि केंद्रीय कार्यालय दिल्ली में होता तो निश्चित रूप से संगठन व समाजबंधुओं को इसक़ा लाभ और अधिक मिलता।

प्रश्न 11 -  आपको ऐसा नहीं लगता की  केंद्रीय कार्यालय के मुद्दे को लेकर राजनीतिक की जा रही है? जो आये दिन चर्चा का विषय बना रहता है...!
- केंद्रीय कार्यालय को लेकर यदि कोई अनावश्यक समाज में भ्रांतियाँ फैलाता हो तो उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। महासभा का कार्यकारिणी मंडल समाज की  आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने में सक्षम है।

प्रश्न 12 - समाजजनों का एक सपना ''कोलकाता  छात्रावास'' जिसका भूमिपूजन हो चुका था उस छात्रावास का निर्माण अभी तक क्यो नहीं हुआ? इसके पीछे क्या कारण है?
- कोलकाता छात्रावास के लिए कोई प्रगति नहीं हो सकी इसके लिए स्थानीय लोगों को आगे आकर इस ओर प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 13 - महासभा के कार्यसमिति व कार्यकारिणी मंडल में छात्रावास के अनुभवी ट्रस्टीयों को सदस्य के रूप में प्रतिनिधि बतौर लेना उचित है?
- महासभा का मौजूदा विधान जो पिछले सत्र से ही चला आ रहा है उसमें इस तरह का प्रावधान का समावेश है मेरे कार्यकाल में इस तरह का कोई परिवर्तन नहीं हुआ है यदि कोई संशोधन चाहे तो कार्यकारिणी मंडल इस कार्य के लिए सक्षम है।

प्रश्न 14 - जब महासभा की दो भुजाएँ महिला संगठन व युवा संगठन है तब इनके स्वतंत्र अधिकारों की बात का क्या मतलब है? यह संगठन किनके अधिनस्थ है...? यदि इनके स्वतंत्र अधिकार है तो महासभा का  क्या औचित्य है...?
- जिस प्रकार भुजाओं का संबंध शरीर के साथ होता है वहीं संबंध महिला संगठन, युवा संगठन की दो भुजाओं का महासभा के साथ संबंध है। महासभा की दो भुजाएँ होते हुए महासभा के अंतर्गत ही दोनों संगठन पूर्व से ही कार्य करते आ रहे हैं जो महासभा के साथ है इसलिए स्वतंत्र अधिकार की कोई बात नहीं है।

प्रश्न 15 - जब एक ओर महामंत्री अपने पद से निवृत्त हो जाता है तब पूर्व महामंत्री (महिला संगठन , युवा संगठन) के पदेन होना क्या पदलोलुपता जैसी बात नहीं है? तब पदेन होने का क्या तात्पर्य है?
- यह एक वैधानिक मसला है और विधान में किसी भी तरह का परिवर्तन कार्यकारिणी मंडल के बहुमत के आधार पर होता आया है महासभा के पदाधिकारी व  कार्यसमिति सदस्य अपनी इच्छानुसार विधान में संशोधन नहीं कर सकते हैं इसलिए दोनों संगठनों के पूर्व महामंत्रीयों को पदेन में लेना व नहीं लेने का अधिकार विधानानुसार है।

प्रश्न 16 - चुनाव में लगातार तीन बार निर्वाचित होने के पश्चात प्रतिबंध का प्रावधान उचित है? और उनकी लगातार तीन बार सेवा लेने का तात्पर्य क्या है?
- इस शैली के पीछे मूल भावना यह है कि समाज के नये चेहरों को भी कार्यकारिणी मंडल से जुडने का मौका मिले ताकि संगठन और अधिक सृदढ हो परंतु इस प्रावधान को पारित करना या नहीं करना कार्यकारिणी मंडल पर निर्भर है।

प्रश्न 17 - पिछले सत्र में महामंत्री के पत्र बराबर मिलते रहते थे परंतु अब सदस्यों की यह शिकायत आ रही है कि महेश नवमी, दीपावली आदि त्यौहारों पर महासभा की सूचनाएँ जो समय-समय पर मिलती थी अब निर्वाचित होने के बाद से यह कार्यशैली कहां गुम हो गई है?
- महेश नवमी और दीपावली पर्व पर शुभकामनाएँ समाजबंधुओं को सभापति और महामंत्री के द्वारा सभी को प्रेषित की जाती है उस गरीमा को ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए।

प्रश्न 18 - समाजजनों का सवाल है कि समाज में महासभा संगठन में पूंजिपतियों व धनाढय वर्ग का वर्चस्व बना हुआ है? और छोटे तबके को वर्चस्व नहीं दिया जाता है। इस बारे में आपकी क्या राय है?
- ऐसा सोचना गलत है महासभा के पदाधिकारियों व कार्यसमितियों के सदस्यों में अधिकांश पदाधिकारीगण व उनके द्वारा समाज में दी गई सेवा के कारण चुन कर आए है वे सामान्य वर्ग के हैं।



 


3 Comment(s) on “महासभा - सवाल आपके, जवाब सभापति के....“

Comment by : Jugal Kishore Somani , Jaipur 04/07/2011 10:15 AM

सभापति जी का प्रायः हर प्रश्न के उत्तर में कि "कार्यकारी मंडल निर्णय लेने में सक्षम है " कुछ अटपटा सा लगा. मैं समझता हूँ कि अपनी स्वयं की जिम्मेदारी का अहसास प्रत्येक जिम्मेदार को होना ही चाहिए.वार्ता में ऐसी झलक कम नज़र आ रही है. उम्र दराज समाज सेवियों को नज़र अंदाज करने की कल्पना ही स्वार्थ पूर्ण है , भले ही ऐसे सुझाव कहीं से भी आये हो,सभापति जी को व्यक्तिगत रूप से खंडन करना चाहिए. लगातार तीन सत्रों तक कार्यकारी मंडल सदस्य रहने के बाद नए को मौका मिलना चाहिए , क्या यह निर्णय "आजीवन पदेन" या "मनोनीत" सदस्यों पर भी लागू होगा ?ऐसे पदेन सदस्यों में "श्री कोठारी बंधू शौर्य ट्रष्ट" द्वारा सम्मानित बंधुओं का समावेश क्यों नहीं होता है ,जबकि महासभा का यह सर्वोच्च सम्मान है ! इन्हें भी "आजीवन पदेन" बना कर अतिरिक्त सम्मान दिया जा सकता है . नागपुर में वर्षों से चले आये महासभा कार्यालय के विवाद में किसी दिवंगत सभापति को घसीटना शोभाजनक नहीं लगता.कार्यालय दिल्ली में हो या भीलवाड़ा में , समाज हित के कार्यक्रम ही सर्वोपरी होने चाहिए.महासभा के मुखपत्र "माहेश्वरी"में सभी महत्वपूर्ण लेखों का बिना किसी भेद भाव समावेश होना चाहिए.खेद है कि वहां से किसी पत्र / मेल उत्तर ही नहीं आता. मैं स्वयं भुक्त भोगी हूँ . पारदर्शिता की अत्यंत आवश्यकता है. जुगल किशोर सोमाणी , कार्यकारी मंडल सदस्य , जयपुर से .

Comment by : shankar daga 04/07/2014 09:34 AM

jai shri mahesh, jesa ki aajkal ke bache education ko jyada ahmiyat dete he, aur wo log bad me job ke liye intzar karte he, kyo na samaj unki job dhoondhne me help kare.

Comment by : vilas laddha 05/10/2015 09:19 AM

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